सुलग उठा सिन्दूर

Sulag utha Sindoorऐसा नहीं की वह अपनी पत्नी से प्यार नहीं करता था, बहुत चाहता था वह उसे लेकिन उससे भी ज्यादा चाहता था दौलत को । उसी दौलत की खातिर उसने अपनी पत्नी तक को दांव पर लगा दिया और जब होश आया तोह बहुत दूर निकल चूका था । यह उपन्यास बताता है कि लालच इंसान को क्या से क्या बना देता है ।

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