देश न जल जाये

desh na jal jayeयह एक उपन्यास नहीं देश के नौजवानो को लिए एक नारा है । ऐसा नारा जो जितना प्रसांगिक तब था जब यह उपन्यास लिखा गया था और उतना ही प्रासंगिक आज भी है अगर आप यह जानना चाहते है कि हमारे देश को कैसे कुछ लोग जलने की कोशिश कर रहे है । तो इस उपन्यास को जरूर पड़े ।

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