मेरे बच्चे मेरा घर

mere bachche mera gharविजय क सामने अपने पिता यानि ठाकुर निर्भयसिंघ का ऐसा रूप आया जिसके सामने आने पर विजय की रगो मे दौड़ता खून मनो जम गया । वह सोच भी नहीं सकता था कि ठाकुर साहब अपने स्वार्थ क लिए मासूम लोगो का कत्ल तक कर सकते है ।

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