जला हुआ वतन

एक ऐसा शख्स जिसकी रगो में खून नहीं पानी बहे रहा हो, उसका भी अगर वतन जल रहा हो, तो वो भी चेन की नींद नहीं सो सकता है । ऐसे शख्स की लोमहर्षक कहानी है ये ।

फ़ासी दो कानून को

fansi do kanun koअगर फांसी ही देनी है तो कानून को दो क्यों कि उसने एक को नहीं, दो को नहीं, बल्कि तीन तीन लोगों को एक ही जुर्म में फँसी पर चढ़ा दिया जबकि वे बेक़सूर थे । ऐसे अवस्था में क्या कानून ही ऐसा हत्यारा नहीं हुआ जिसे फांसी पर चढ़ा देना चाहिए ।

कानून बदल डालो

kanoon badal daloएक कत्ल हुआ । कातिल पकड़ा गया । उसे सजा भी हो गई फँसी । पता लगा वो कातिल नहीं था जिसे फँसी पर चढ़ा दिया गया । कातिल तोह कोई और ही था । तो अब, कानून उसे वापस कंहा से लाएगा जिसे फँसी पर चढ़ा दिया गया ।

देश न जल जाये

desh na jal jayeयह एक उपन्यास नहीं देश के नौजवानो को लिए एक नारा है । ऐसा नारा जो जितना प्रसांगिक तब था जब यह उपन्यास लिखा गया था और उतना ही प्रासंगिक आज भी है अगर आप यह जानना चाहते है कि हमारे देश को कैसे कुछ लोग जलने की कोशिश कर रहे है । तो इस उपन्यास को जरूर पड़े ।

हिन्द का बेटा

hind ka  betaएक ऐसे बेटे की कहानी जो पैदा चाहे किसी की भी कोख से हुआ हो लेकिन एक ही ख्वाहिश थी उसकी । यह कि लोग उसे हिन्द का बेटा कहे और इस ख्वाहिश को पूरा करने क लिए वह कुछ भी करने को तैयार था – कुछ भी ।

गुलिश्तां खिल उठा

यह एक ऐसे देश की है है जो सदियों से अमेरिका का गुलाम था । एक छोटे से लड़के ने उस गुलिस्तां को खिलने की सौगंध बचपन में ही खा ली थी और फिर, कैसे उसने इस कसम को पूरी कर क दिखाया ।

वतन

वतन नमक किरदार सिंगही जैसे हिंसक शख्स का ऐसा शिष्य है जो अहिंसा का पुजारी है । अहिंसा का पुजारी होने क बावजूद वह अमेरिका जैसे देश से भीड़ गया और बगैर एक बूँद भी खून बहाये कैसे विजयी हुआ, यह जानना आपने आप में रोचक है ।