माटी मेरे देश की

mati mere desh ki-1यह उपन्यास साबित कर देगा की थ्रिल, सस्पेंस सेंटीमेंट और
इन्वेस्टीगेशन की दुनिया में नक्काल भले ही चाहे कितने घुस आये लेकिन
जो जादूगर है वह जादूगर ही रहेगा और जादूगर वह होता है जिसकी कलम
आपको खाना खाने तक की फुरसत न दे |

हत्यारा कौन

hathyara kaunद्रष्टि के अंतिम चोर तक फैला समुंद्र । उसके बीच फंसा एक शिप और एक एक कर के शिप में मौजूद लोगों के मर्डर होने लगते है । जाहिर है हत्यारा भी शिप में मौजूद है मगर कौन था वो ? यह सवाल आपको उपन्यास के अंतिम पृष्ठ तक चिपकाये रखेगा ।

खून ने रंग बदला

khoon ne rang badlaखून का सिर्फ एक ही रंग होता है । लाल । मगर शहर में जो लाशें मिल रही थी उनके आसपास नीले रंग का खून बिखरा मिलता था । क्या था इस गुत्थी का रहस्य और खून का रंग कैसे बदल जाता था ।

शेर के बच्चे

sher ka bacchaऐसे कैसे कारनामे करता था वह लड़का जिसकी वजह से लोग उसे शेर का बच्चा कहने लगे । एक बार तो ऐसा मौका भी आया जब उसने शेर के मुह में हाथ डालकर एक बच्चे की जान बचाई ।

कर्फ्यू

karfyuदो बच्चे थे । एक हिन्दू, एक मुस्लमान । दोनों एक जिस्म दो जान थे । शहर में साम्प्रदायिक दंगा फैला तो हिन्दू बच्चा मुस्लिम परिवार में जा फंसा और मुस्लिम बच्चा हिन्दू के परिवार में । किसके साथ क्या हुआ ?

रूक गयी धरती

Rook gayi Dhartiयह घटना बड़ी दिलचस्प है कि अगर धरती रुक जाये तो क्या हो ? वो सिंगही था जिसे धरती को रोक दिया और वे विजय, विकास और अलफांसे थे जिन्होंने रुकी हुई धरती को पुनः गतिमान किया मगर ये दोनों काम कैसे हुए, ये जानना बहुत ही दिलचस्प होगा ।

चकमा

chakmaएक ऐसे मर्डर मिस्ट्री जिसने विजय जैसे धुरंदर को न केवल चकमे पर चकमे दिए बल्कि जब रहस्य से पर्दा उठा था तो खुद उसका दिमाग भी चक्र गया । ऐसे कातिल से विजय का सामना पहले कभी नहीं हुआ था ।

विश्व युद्ध की आग

इस उपन्यास में आगामी विश्वयुद्ध की कल्पना की गए है और जिन लोगों ने इस उपन्यास को पड़ा है , उनकी राय के मुताबिक वेद प्रकाश शर्मा ने बहुत ही सटीक कल्पना की है ।

धरती बानी दुल्हन

धरती जब दुल्हन बनती है तो उसका श्रृंगार आम दुल्हन की तरह नहीं होता बल्कि उसके मस्तक पर किसी माँ के लाडले का खून बिंदिया बनकर चमकता है । किसी दुल्हन के सुहाग का लहू इस दुल्हन के होठों की लाली बनती है किसी बहन की राखी इस दुल्हन के माथे का टिका बनकर चमकती है ।

चीख उठा हिमालय

cheekh utha himalayaहिमालय हमारी सीमाओं का प्रहरी है । जब वह ही गोलियों की आवाज़ और गोलों की गर्जना से चीख उठा तो हिमालय क प्रहरियों ने खून की कैसी नदियां बहाई ।